मुंबई, राष्ट्रपति के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी को सपोर्ट देने के शिवसेना के निर्णय से महाराष्ट्र बीजेपी आगबबूला गई है , पर हमेशा की तरह इस बार भी वह अपमान का घूंट पीने को मजबूर हुई है। बीजेपी के अधिसंख्य नेताओं ने बाल ठाकरे को सनकी बताकर कहा कि ' वे हर बार ऐसा ही करते हैं। उनके सलूक में तर्क ढूंढना बेवकूफी है। अपमान सहने के अलावा क्या कर सकती हैं बीजेपी ?' उनमें से कुछ ने बताया कि ' प्रणव के मित्र रहे एक उद्योगपति ने अपने तरीके से ठाकरे को मना लिया है। उससे पहले एनसीपी के नेता शरद पवार मातोश्री में फील्डिंग लगा चुके थे। सूत्रों ने बताया कि पवार ने श्री मुखर्जी एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से वादा किया था कि वे शिवसेना के मत यूपीए को दिलाएंगे।
पिछली बार भी एनडीए का फैसला ठुकराकर ठाकरे ने प्रतिभा पाटील को मत दिया था। बीजेपी के एक नेता ने बताया कि पाटील के मामले में तो बात समझ में आती है। तब मुद्दा मराठी उम्मीदवार का समर्थन करने का था , पर इस बार मुखर्जी के समर्थन का लॉजिक समझ में नहीं आता।
सिर्फ राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में ही नहीं , शिवसेना ने बीजेपी को एक और झटका दिया है। मुंबई शिक्षक चुनाव क्षेत्र से विधानपरिषद की सीट के लिए उसने बीजेपी की बागी उम्मीदवार मनीषा कायंदे को टिकट दे दिया है। दो दिन पहले बीजेपी ने मनीषा को पार्टी से निकाल दिया है। इस सीट के लिए उसके अधिकृत उम्मीदवार शरद यादव हैं। विधान परिषद का चुनाव 7 जुलाई को है।
नीतेश राणे ने साधा निशाना
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रणव मुखर्जी को समर्थन जताने पर शिवसेना को आड़े हाथों लेते हुए प्रदेश के मंत्री नारायण राणे के बेटे और स्वाभिमान संगठन के प्रमुख नीतेश राणे ने कहा कि बाल ठाकरे की पार्टी अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। नीतेश ने कहा , ' वे इस समय दयनीय स्थिति से गुजर रहे हैं और अपना अस्तित्व दिखाने के लिए वे इस तरह की चीजें कर रहे हैं। '




