सिंगापुर, अमेरिका और यूरोपीय संघ [ईयू] की पाबंदी के असर को कम करने के लिए ईरान ने अपने कच्चे तेल [क्रूड] के ग्राहकों को लुभाना शुरू कर दिया है। उसने घोषणा की है कि वह एशियाई देशों को 2-8 सेंट प्रति बैरल कम कीमत पर अपने उत्पाद बेचेगा। इससे प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का तेल निर्यात जारी रहेगा। वहीं चीन, भारत और जापान जैसे देशों को आयात पर कम विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ेगी। वैसे भी ये तीनों देश ईरानी कच्चे तेल के क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे सबसे बड़े ग्राहक हैं।
अमेरिकी दबाव में भारत और जापान ने ईरान से तेल आयात में कटौती करने की घोषणा कर रखी है। भारत को इस खाड़ी देश से पहले से ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले सस्ता तेल मिलता रहा है। वहीं चीन भी अमेरिका के दबाव में आता दिख रहा है। चीन की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी सिनोपेक ने इस साल ईरान से तेल आयात में करीब एक लाख बैरल रोजाना कटौती करने की योजना बनाई है। पिछले साल सिनोपेक ने पांच लाख बैरल रोजाना ईरानी क्रूड का आयात किया था।
अमेरिका ने सोमवार को छह देशों को ईरान से तेल आयात में पाबंदी से छूट दे दी। इनमें दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर बाकी सभी एशियाई देश हैं। इस सूची में चीन का नाम नहीं है। अमेरिका का यह कदम ड्रैगन पर दबाव के रूप में देखा जा रहा है। इसके सामने चीन ने झुकने का संकेत दे दिया है। चीन की साम्यवादी सरकार अब तक किसी एक देश या गुट की पाबंदी का विरोध करती रही है। वक्त की नजाकत को समझते हुए ईरान ने भी लगे हाथ कीमत घटाने की घोषणा कर दी। ईरान की अर्थव्यवस्था तेल पर ही निर्भर है। एक जुलाई से यूरोपीय और अमेरिकी पाबंदी लागू हो जाएगी। ऐसे में तेहरान की सरकार ने ग्राहकों को लुभाने का यह दांव खेला है। वैसे, भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शिपिंग इंश्योरेंस के विकल्प की तलाश में जुटे हैं। पहली जुलाई से यूरोपीय कंपनियां ईरानी तेल के टैंकरों का बीमा करना बंद कर देंगी।




