नई दिल्ली, लगता है समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अगली पीढ़ी को विरासत सौंपने की पूरी तैयारी कर ली है। अब वह अपने सांसद बेटे अखिलेश यादव की सोच पर पार्टी को आगे बढ़ाना चाह रहे हैं। उन्होंने यह मान लिया है कि अब बिना कंप्यूटर और अंग्रेजी के काम नहीं चलेगा।
एसपी ने शुक्रवार को घोषणापत्र जारी किया। घोषणापत्र में बाकी बातें तो चुनावों के हिसाब से सामान्य कही जा सकती हैं। सिर्फ एक वादा है जिसने मुलायम के पुराने साथियों समेत उनके विरोधियों को भी चौंकाया है। यह वादा है छात्रों को टैबलेट और लैपटॉप बांटने का। घोषणापत्र के मुताबिक 10वीं पास करने वाले छात्रों को टैबलेट और 12वीं पास करने वाले छात्रों के लैपटॉप मुफ्त दिए जाएंगे। इसके अलावा मुसलमानों को जनसंख्या के आधार पर आरक्षण दिया जाएगा। एक आकलन के मुताबिक यूपी में मुसलमान की आबादी 18 प्रतिशत है।
लैपटॉप और टैबलेट की बात चौंकाने वाली इसलिए हैं क्योंकि अभी तक मुलायम अंग्रेजी और कंप्यूटर विरोध के लिए जाने जाते थे। पिछले सालों में उनके विरोधी इसी आधार पर उन्हें 'विकास विरोधी' कहते रहे हैं। 14 साल तक मुलायम के करीबी रहे अमर सिंह ने भी इसी आधार पर उनकी आलोचना की थी। और तो और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने भी उन पर इसी बात को लेकर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि मुलायम सिंह अंग्रेजी और कंप्यूटर का विरोध करते हैं जबकि उनके बेटे अखिलेश यादव अंग्रेजी भी बोलते हैं और कंप्यूटर भी चलाते है।
एसपी ने बदला नजरिया
इन आरोपों के मद्देनजर यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इन मुद्दों पर समाजवादी पार्टी अपना नजरिया बदलेगी। लेकिन इस तरह के बदलाव की उम्मीद शायद ही किसी को होगी। जहां तक अखिलेश का सवाल है, पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के वे मुखिया हैं। विधानसभा चुनावों में प्रचार की कमान भी उनके ही हाथों में है। अखिलेश ने क्रांति रथ और साइकिल के जरिए प्रदेश में सफल प्रचार किया है। वह राहुल गांधी और मायावती पर सीधे हमले करते रहे है। खुद मुलायम सिंह यादव ने कई मौकों पर यह साफ संकेत दिए हैं कि अखिलेश के फैसलों पर वह भी कोई सवाल नहीं उठाते हैं। जहां तक मुसलमानों से जुड़ी घोषणाओं का सवाल है उनका अनुमान सभी को था। मुलायम सिंह और अखिलेश लगातार यह कहते आ रहे हैं कि मुसलमानों को आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाना चाहिए।
आखिर कहां से आएगा इतना पैसा ...
जहां तक इन घोषणाओं के आर्थिक पक्ष का सवाल है - मोटा अनुमान है कि दसवीं और बारहवीं के छात्रों की संख्या के हिसाब से अगर लैपटॉप और टैबलेट बांटे गए तो करीब 2625 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। युवाओं को बेरोजगारी भत्ते के प्रस्ताव को भी जोड़ा जाए तो यह राशि और ज्यादा हो जाती है। अगर पार्टी सत्ता में आई तो इस राशि की व्यवस्था कहां से होगी - यह एक बड़ा सवाल है।
65 साल के किसानों को पेंशन , मेधावी छात्रों के लिए विद्या धन में बढ़ोतरी , रिक्शों में मुफ्त मोटर लगवाने और बीपीएल योजना के तहत महिलाओं को दो साड़ी और बुजुर्गों को एक - एक कंबल देने आदि की घोषणाएं भी सरकारी खजाने पर बोझ डालेंगी। आखिर इसके लिए धन कहां से आएगा।




