वाशिगटन। पाकिस्तान में नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने कहा है कि उसे पाकिस्तानी सेना से इस बात का कोई आश्वासन न ही मिला है और न ही उन्होंने मांगा है कि वे तख्तापलट नहीं करेंगे।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता नौसेना कैप्टन जॉन किरबी ने कहा, मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि हमने कोई आश्वासन मांगा है और मैं नहीं समझता कि हमें ऐसा कुछ आश्वासन दिया गया है। यह मामला पाकिस्तानी अधिकारियों और वहा की सरकार के नेताओं के लिए है। सेना और असैन्य सरकार को समाधान ढूंढ़ना चाहिए।
इस बीच, अमेरिका के ज्वायंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्टिन डेम्पसे ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज कयानी को दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों पर चर्चा करने के लिए फोन किया।
ज्वायंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता कर्नल डेव लपान ने कहा, बातचीत गर्मजोशी भरी और पेशेवर थी। यह संबंधों और एक दूसरे को समझने की नियमित कवायद का हिस्सा है जो दोनों ओर की सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम एक जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं। पेंटागन के अधिकारी ने संकेत दिया कि फोन करने के समय का पाकिस्तान में हो रहे घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं है। फोन कॉल के बारे में पहले से योजना बनाई जा चुकी थी। लपान ने कहा, यह कॉल कल हुई और यह पूर्व नियोजित थी। इससे पहले दोनों के बीच फोन पर अंतिम बातचीत 21 दिसंबर को हुई थी।
इससे पहले पाकिस्तान उस समय ताजा संकट में फंस गया जब शक्तिशाली सेना ने प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी द्वारा हाल ही में सेना और आईएसआई की आलोचना किए जाने के बाद उन्हें गंभीर परिणाम की चेतावनी दी। वहीं प्रधानमंत्री गिलानी ने भी मेमोगेट काड पर अपने रक्षा सचिव को बर्खास्त कर दिया।
पेंटागन अधिकारियों ने सेना और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली नागरिक सरकार के बीच चल रही रस्साकशी पर कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान का आतरिक मामला है।
लिटल ने कहा, मैं इस बात पर कोई अटकल नहीं लगाऊंगा कि पाकिस्तान के आतरिक राजनीतिक घटनाक्रम किस तरह से अमेरिका के साथ उसके रिश्तों को प्रभावित करेंगे या नहीं करेंगे।
हालांकि, पाकिस्तान में असैन्य लोकतंत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए अमेरिका ने कहा है कि वह इस देश में स्थिति पर नजर रखे हुए है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के रक्षा सचिव की बर्खास्तगी के बाद सरकार और सेना के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारत पड़ोसी देश की घटनाओं पर बारीकी से नजर रख रहा है।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली सरकार और सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी के नेतृत्व वाली पाक सेना के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर अमेरिका का असैन्य सरकार को समर्थन संबंधी बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता विक्टोरिया नुलैंड ने कहा, हम असैन्य सरकार का समर्थन करते हैं। पाकिस्तान की सेना के साथ हमारे गहरे संबंध हैं और हम चाहते हैं कि सभी पक्ष मिलजुलकर काम करें। यह मामला पाकिस्तान को सुलझाना है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इसमें अमेरिका का बीच में आना उचित है।




