पूर्वी दिल्ली स्थित लक्ष्मीनगर इलाके में धराशाही हुई पुरानी इमारत के मलबे से बचावकर्मियों ने आज और शव निकाले जिससे सोमवार रात हुई इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या आज बढ़कर 65 हो गई। लक्ष्मीनगर के ललिता पार्क इलाके में यह घटना शाम सवा आठ बजे जब वहां स्थित 15 वर्ष पुरानी एक इमारत अचानक ढह गई। जिस समय इमारत ढही वहां अवैध रूप से पांचवीं मंजिल का निर्माण कराया जा रहा था। इसी बीच दिल्ली सरकार ने मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को एक लाख रुपए देने की घोषणा की है।जानकारी के मुताबिक इस इमारत में अप्रवासी मजदूरों के 10 परिवार रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि इस दुर्घटना के बाद से इमारत का मलिक अमृत सिंह फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अमृत सिंह इमारत के धराशाही होने के कुछ ही देर बाद अपने परिवार सहित फरार हो गया। हम उसकी तलाश कर रहे हैं। दिल्ली की स्वास्थ्य मंत्री किरण वालिया ने कहा कि अभी तक इस दुर्घटना में 65 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने बताया कि इस दुर्घटना के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिये गए हैं।
अभी तक 39 शव लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, 16 लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, पांच हेडगेवार अस्पताल और एक शव गुरु तेग बहादुर अस्पताल पंहुचाया गया है। अधिकारियों का कहना है इस हादसे में लगभग 80 लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल एनडीआरएफ) के बचाव कर्मचारी, अग्निशमन विभाग, पुलिस, नागरिक सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों ने फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए मलबा हटाने का काम रात भर जारी रखा। ऐसा संदेह है कि इस बार के मानसून में भारी वर्षा होने के कारण इस इलाके में यमुना नदी का पानी जमा हो गया था जिससे यह मकान कमजोर हो गया। अभी और लोग दबे हो सकते हैं जिन्हें राहत एवं बचावकर्मी तलाश कर रहे हैं। रात से चल रहे बचाव कार्य में मदद के लिए आपदा प्रबंधन दल के 250 सदस्यीयों को यहां तैनात किया है।
जानकारी के मुताबिक करीब 1200 वर्ग फीट में बनी इमारत ललिता पार्क आई-ब्लॉक गढ़वाली कॉलोनी में स्थित थी। इमारत में बेसमेंट व ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिल बनाई गईं थीं। इनमें ज्यादातर पश्चिम बंगाल के कामगार रहते थे। अमृत सिंह नामक व्यक्ति की इस इमारत में करीब पचास कमरे थे। इमारत की निचली मंजिल पर जैकेट बनाने की फैक्ट्री और दुकानें थीं और ऊपर की मंजिल पर किराये पर लोग रहते थे। सोमवार रात सवा आठ बजे फैक्ट्री में काम चल रहा था तभी देखते ही देखते इमारत ढह गई। सूचना मिलते ही पुलिस व राहत बचाव कार्य दल, एमसीडी व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि उन्होंने मलबे के भीतर से मदद के लिए लोगों की चीखें सुनी। स्थानीय लोगों ने बिजली न होने और क्रेन न पहुंचने के कारण भी राहत कार्यों में बाधा पहुंचने की शिकायत की। शीला दीक्षित ने भी स्वीकार किया कि संकरे रास्तों के कारण के्रेनों को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि यह दुखद हादसा है। मुझे नहीं लगता कि दिल्ली में ऐसी घटना इसके पहले कभी हुई है। मानसून बीतने के दो महीने के बाद भी इमारत के बेसमेंट में पानी जमा था, जिससे लगता है कि यह लापरवाही का मामला है। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि क्या यह अवैध निर्माण था और अगर कुछ भी अवैध तरीके से हुआ है तो आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।




