गोण्डा, युगों-युगों से नारी का अपमान ही बडे युद्धों का कारण रहा है, फिर भी लोग इससे सीख नहीं लेना चाह रहे हैं। जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता वास करते हैं । लेकिन दुर्भाग्य है कि देवी की पूजा करने वाले लोग ही यहां भ्रूण हत्या कर कन्याओं का वध करा रहे हैं। यह बात स्थानीय सरकुलर रोड स्थित श्रीराम नर्सिंग होम प्रांगण में बुधवार को श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तृतीय दिवस की कथा में पं. राधेश्याम शास्त्री ने कही। श्री शास्त्री ने कहा कि मृत्यु सत्य और निश्चित है। वह सात दिनों में किसी भी दिन हो सकती है। लेकिन अच्छी मृत्यु वही है जो हरिनाम व कथा का श्रवण करते समय हो। उन्होंने कहा कि भगवान भाव का भूखा है। सच्चे मन से भक्ति करने वाले को किसी चीज की कमी नहीं रहती। यही नहीं हरि भजन में मन लग गया तो जैसे जामुन खाने से जीभ नीली पड़ जाती है उसी तरह हरिनाम के जाप से जीभ स्वयं हरिनाम जपने लगती है। श्री शास्त्री ने कहा कि सुख-दुख शरीर का धर्म है, आत्मा का नहीं। कलियुग में स्नान से तन, दान से धन व प्रभु नाम स्मरण से मन शुद्ध होता है। यह मौका भी जन्म जन्मांतर के पुण्य उदय होने पर ही मिलता है। इस अवसर पर काफ़ी मात्रा मै लोग मोजूद थे ।