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छह साल में दो बातें समझ आई: राहुल

Date: Nov 02, 2010
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Report By: AJAY PRATAP SINGH
NEW DELHI
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि पिछले छह वर्ष में उन्हें जो दो बातें समझ में आई हैं, उनमें एक यह है कि आज दो हिंदुस्तान बन गए हैं-एक अमीरों का और एक गरीबों का लेकिन गरीबों का हिंदुस्तान बंद पड़ा है।
राहुल ने यहां एआईसीसी की बैठक में अपने संबोधन में कहा कि आज दो हिंदुस्तान बन गए हैं। पहले सिर्फ एक हिंदुस्तान हुआ करता था और वह गरीबों का था। लेकिन आज दो हिंदुस्तान बन गए हैं। एक अमीरों का जो तेजी से आगे बढ़ रहा है और दूसरा गरीबों का जो लगभग बंद पड़ा है। हमें दोनों को आगे बढ़ाना है। सिर्फ गरीब व्यक्ति की शक्ति ही इस देश को आगे ले जा सकती है।
सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट और अपने पक्ष में नारों के बीच राहुल ने कुछ मिनट के संक्षिप्त भाषण में कहा कि इन छह वर्षो में उन्हें एक और बात यह समझ में आई कि अगर इन दोनों ही हिंदुस्तान को जोड़ा जा सकता है तो वह केवल एक ही पार्टी यानी कांग्रेस कर सकती है। राहुल ने कहा कि इसकी वजह यह है कि देश की बाकी सभी पार्टियां किसी जाति, प्रदेश या धर्म की पार्टियां हैं और दोनों हिंदुस्तान को जोड़ने का काम एक धर्म, जाति या प्रदेश की पार्टी नहीं कर सकती क्योंकि यह पूरे देश का काम है।
बैठक के निर्धारित कार्यक्रम में राहुल का भाषण होना तय नहीं था लेकिन एआईसीसी सदस्यों की भारी मांग पर उन्हें संबोधन के लिए बुलाना पड़ा। इस पर राहुल ने कहा कि यह प्लान में नहीं था कि मैं भाषण दूं लेकिन आप लोगों ने मुझे फंसा दिया। राहुल ने कांग्रेस का सदस्य होने पर गर्व प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें दिख रहा है कि हर साल इस पार्टी की शक्ति बढ़ती जा रही है। कुछ साल पहले कहा जा रहा था कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में खत्म हो गई, कांग्रेस तमिलनाड़ु में खत्म हो गई। राहुल ने कहा कि यह कहीं खत्म नहीं हुई है। यह पार्टी बहुत आसानी से जाग जाती है और इसे जगाने का एक ही तरीका है-गरीबों को समझना और उनके लिए काम करना।
बैठक में पारित एक प्रस्ताव में राहुल की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा गया, राहुल गांधी ने जमीनी स्तर के चुनाव पर आधारित राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से राष्ट्र की सेवा में नौजवानों की समेकित भागीदारी बढ़ाने के लिए एक नए युग की शुरुआत की है। बैठक शुरू होने से पहले मंच पर पिछली पंक्तियों में बैठे राहुल को अग्रिम पंक्ति में बैठाने की मांग उठी और उनके जयकारे भी लगाए गए।
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