शाहजहांपुर :गुरप्रीत सिंह करीर 'सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं' फिल्म 'कुली' का यह गाना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन गैंगमैन बनने के बाद इनकी संख्या घट गई। इसलिए अब हर आदमी को अपना बोझ खुद उठाना पड़ रहा है।
कुलियों के गैंगमैन बनने के बाद रेलवे स्टेशन पर 59 कुली के स्थान पर मात्र चौबीस ही रह गए हैं। कुछ गैंगमैनों ने कुली से जुड़ने के लिए अर्जी लगाई थी। लेकिन उनकी अर्जी को रेल अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया है।
रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2008 में 59 कुली थे। इनमें 35 कुली गैंगमैन बन गए थे और अब सिर्फ 24 बचे हैं। इन कुलियों में कुछ कुली बीमार रहते हैं और उम्र के हिसाब से अधिक सामान नहीं ढो सकते हैं। इसलिए इक्का-दुक्का कुली स्टेशन पर नजर आते हैं। दो वर्षो में इस मार्ग पर एक दर्जन ट्रेनें बढ़ी हैं और यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है। लेकिन कुलियों की संख्या नहीं बढ़ी है। कुलियों को गैंगमैन बना दिए जाने के बाद रेलमंत्री ममता बनर्जी ने कुलियों की भर्ती नहीं शुरू की है। हालत यह है कि ट्रेन से उतरने के बाद यात्री स्टेशन पर लाल वर्दी पहने कुलियों को ढूंढते हैं, जो दूर तक नहीं दिखाई देते हैं। यदि भूलचूक से कुली मिल गया तो पहले कहेगा कि खाली नहीं हैं। खाली है तो फिर इतने पैसे सामान उठाने के बता देते हैं कि यात्री स्वयं सामान लेकर चल देता है। सबसे अधिक दिक्कत प्लेटफार्म प्रथम से दो-तीन व चार, पांच पर सामान ले जाने में होती है। रेलवे प्रशासन द्वारा कुलियों को रेलवे पास तथा वर्दी देने का प्रावधान है। लेकिन इनकी आयु सीमा नहीं है। कुलियों से बने गैंगमैनों में अरशद, रिजवान, याकूब समेत आधा दर्जन लोगों ने पुराने पेशे कुली से जुड़ने के लिए अर्जी लगाई थी। लेकिन रेलवे अधिकारियों ने उनकी अर्जी को निरस्त कर दिया था। कुछ कुलियों का कहना है कि उनके स्थान पर उनके लड़कों को रख लिया जाए। लेकिन कुलियों की भर्ती शुरू होगी तभी तो ये रखे जाएंगे।
इंसैट
स्टेशन अधीक्षक जीसी श्रीवास्तव का कहना है कि ट्रेनें व यात्रियों की संख्या बढ़ी है इसलिए कुलियों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक साल पहले कुलियों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे। लेकिन अनुमति न मिलने के कारण अभी तक भर्ती नहीं हो पाई है।





