नई दिल्ली। देश के कई क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक जमीन गंवा चुकी कांग्रेस ने कहा कि वह अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल और गठबंधन का सम्मान करती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी अपनी राजनीतिक जगह छोड़ दे।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को यहां अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नवनिर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि अगले दो वर्ष के भीतर देश भर में 10 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह बहुत बड़ा इम्तहान होगा और जीत के लिए हमें एकता, समर्थन और समर्पण के साथ तैयार होना होगा। हमें जमीनी स्तर पर भी तैयारी करनी होगी। उन्होंने देश के कुछ राज्यों में अपनी पार्टी की खोई जगह फिर से पाने के इरादे जाहिर करते हुए कहा दूसरी पार्टियों के साथ हमारे तालमेल और गठबंधन का हम सम्मान करते हैं लेकिन इसके ये मायने हरगिज नहीं हैं कि हम अपनी ताकत को बढ़ाना छोड़ दें या अपनी जगह छोड़ दें।
सोनिया ने कहा कि कांग्रेस ने बहुत उतार चढ़ाव देखें हैं। हमारी अंदरूनी ताकत की बहुत बार परीक्षा हो चुकी है। लेकिन हमने अपनी निष्ठा और कड़ी मेहनत के जरिए हर विषम स्थिति में जीत हासिल की है। उन्होंने कुछ इलाकों में पार्टी की खोई जगह वापस पाने के लिए कांग्रेस नेताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि देश में ऐसी कोई दूसरी पार्टी नहीं है जो हर शहर, गांव, मोहल्ले या ब्लॉक स्तर पर मौजूद हो। हमें अब नई ताकत के साथ आगे बढ़ना होगा।
खोई जमीन वापस पाने के कांग्रेस अध्यक्ष के इस दो टूक बयान को अगले वर्ष होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पार्टी की तृणमूल कांग्रेस के साथ सीटों पर तालमेल को लेकर काफी खींचतान चल रही है। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी वहां जाकर पहले ही आगाह कर चुके हैं कि तृणमूल कांग्रेस के साथ पार्टी गठबंधन चाहती है लेकिन 'सम्मान' के साथ।
पश्चिम बंगाल के बाद कांग्रेस के लिए अन्य महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाड़ु है और वहां भी पार्टी ने द्रमुक या अन्नाद्रमुक से तालमेल के बिना ही आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का इरादा किया है। बिहार में पार्टी पूर्व सहयोगी दल राजद और लोजपा के बिना अकेले ही मौजूदा विधानसभा चुनाव लड़ रही है। उत्तर प्रदेश भी में पिछले लोकसभा चुनाव में उसने किसी भी दल से तालमेल नहीं किया था और उसे 22 सीटें जीतने के साथ भारी लाभ मिला था।
सोनिया ने पार्टीजनों को आगाह किया कि कांग्रेस सिर्फ एक कारगर चुनावी मशीन बनकर नहीं रह सकती, बल्कि हमें अपनी राजनीतिक जमीन बनाए रखने और उसका विस्तार करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने राहुल का नाम लिए बिना ही उनके कार्यों की सराहना की और कहा कि यह खुशी की बात है कि एनएसयूआई और युवक कांग्रेस नई पीढ़ी को संगठन में लाने का सराहनीय काम कर रहे हैं।
आधी हिंदी और आधी अंग्रेजी में किए अपने भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष ने हालांकि महाराष्ट्र के आदर्श आवासीय सोयायटी में घोटाले या राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया जिसे लेकर पार्टी की साख को खासी चोट पहुंची है।
सोनिया ने महंगाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बात को लेकर मुझे खास चिंता है कि खाने-पकाने और रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली चीजों की कीमतें एक समस्या बनी हुई हैं। शेयर बाजार की छलांग और निजी निवेश की ऊंची दरों के कारण हमें आम हिंदुस्तानियों की मुश्किलों का अंदाजा नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर कम करना आज भी चुनौती है। कुछ कमी आई है लेकिन इस दर को और नीचे लाने की हमें जरूरत है।
अयोध्या विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए सोनिया ने कहा कि यह फैसला किसी भी तौर पर छह दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को अंजाम देने वालों को दोषमुक्त नहीं करता है। यह फैसला मस्जिद विध्वंस का शर्मनाक और आपराधिक कृत्य करने वालों को बरी नहीं करता है।
कश्मीर के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए सोनिया ने वहां नौजवानों और सुरक्षाबलों के कर्मियों की जान जाने पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या सुलझाने के लिए विकास पर ध्यान रखने के साथ ही हमें वहां के लोगों से संवाद साधना होगा। इसके लिए केंद्र की ओर से नियुक्त वार्ताकारों के दल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कश्मीर के असंतुष्ट तबकों से वार्ता में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि वे सरकार के इरादे पर भरोसा करें और इस कोशिश में सहयोग दें। राज्यसभा में पारित हो चुके महिला आरक्षण विधेयक के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी इसे अब संसद केच् उच्च सदन के बाद लोकसभा में पारित कराने के लिए कटिबद्ध है।
मुंबई के आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि यह साफ है कि इस घृणित कृत्य के लिए कौन जिम्मेदार है। ऐसा करने वालों को सजा दिलाई जाएगी और आतंकवाद से निपटने की दिशा में किसी तरह की कोई ढील नहीं दी जाएगी




